इटावा | अमूमन पुलिस अधिकारियों को अपराध पर नकेल कसने की दिशा में ही सक्रिय होते हुए देखा जाता है लेकिन इटावा के एसएसपी संजय कुमार टीचर बनकर स्कूली छात्र छात्राओं को आईएएस,आईपीएस,डॉक्टर और इंजीनियर बनने के टिप्स दे रहे है।
आईपीएस अधिकारी की अध्यापक की भूमिका की सर्वत्र सराहना हो रही है। टिप्स के बाद स्कूली छात्र छात्राएं ना केवल प्रफुल्लित नजर आ रहे हैं बल्कि स्कूल के प्रधानाचार्य और अन्य टीचर भी उनके द्वारा दी गई सीख से लवरेज बने हुए हैं। टिप्स से पुलिस मॉर्डन स्कूल के स्कूली छात्र छात्राएं बेहद खुश और प्रफुल्लित नजर आ रहे हैं । स्कूली छात्र छात्राओं का कहना है कि एसएसपी की तरफ से जो बातें उन्हें बताई गई है, कहीं गई है। उससे उनको ऐसा लगता है कि वे अपने जीवन में अगर वाकई में अपनाए तो कामयाबी के रास्ते जरूर पहुंचेंगे।
पुलिस मॉर्डन स्कूल की छात्रा आकांक्षा चौहान का कहना है कि एसएसपी सर स्कूल में क्लास लेने के लिए आए तो उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं को कहा कि पहले एक लक्ष्य तय करो और उसके बाद उस लक्ष्य पर फोकस करके ध्यान से अपनी पढ़ाई करो ताकि आगे बढ़ने में कोई कठिनाई ना खड़े हो।
छात्रा यशवी का कहना है कि हम अपने फ्यूचर में अपने गोल को कैसे डैडीकेशन के साथ अचीव कर सकते हैं। मैं एक आईएएस आॅफिसर बनना चाहती हूं इसलिए एसएसपी की ओर से दिए गए टिप्स को आगे जरूर अपनाया जायेगा ताकि आगे का रास्ता आसान हो जाए। छात्रा अनन्या त्रिपाठी का कहना है कि हम स्कूली छात्र छात्राओं को एसएसपी सर ने यूपीएससी परीक्षा को क्रैक करने के लिए जो टिप्स दिए हैं वह हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसका इस्तेमाल हम अपनी आगे की पढ़ाई में जरूर करेंगे ताकि कामयाबी के रास्ते पर आगे बढ़ने में हमें खासा फायदा मिले।
छात्र अमन यादव ने बताया कि एसएसपी सर ने बताया कि सोशल मीडिया से दूर रहना पड़ेगा। स्कूली बच्चे सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव रहते हैं अगर जीवन में आगे बढ़ना है तो सोशल मीडिया से हर हाल में दूरी बनानी पड़ेगी। ट्रैफिक नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि 18 साल की उम्र के बाद ही मोटरबाइक या अन्य गाड़यिों को चलाने के प्रति लालायित हो अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है जो उनके जीवन को आगे प्रभावित करेगी।
एसएसपी संजय कुमार ने बताया कि स्कूली बच्चों ने उनसे पूछा आईएएस आईपीएस डॉक्टर और इंजीनियर कैसे बना जा सकता है या प्रशासनिक सेवा में कैसे आते हैं। इस लिहाज से अपने अनुभव उनको बताए। रामधारी ंिसह दिनकर और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कालजई कई रचनाओं का भी जिक्र करते हुए स्कूली बच्चों को टिप्स दिए। स्कूली बच्चों में कुछ नया करने का जोश और जुनून बातचीत के दौरान दिखाई दिया है। स्कूली बच्चों से राष्ट्रगान के बारे में जानकारी करने पर काफी महत्वपूर्ण जानकारियां स्कूली बच्चों ने दी है।
