झांसी | बुंदेलखंड क्षेत्र की महत्वपूर्ण झांसी संसदीय सीट पर यूं तो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का प्रभाव नजर आता है लेकिन कभी यह सीट भी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी और भाजपा की ओर से राजेंद्र अग्निहोत्री ने यहां पहली बार कमल खिलाया था।
इस सीट पर वर्तमान में मुख्य मुकाबला भाजपा उम्मीदवार अनुराग शर्मा और इंडिया समूह के प्रत्याशी प्रदीप जैन आदित्य के बीच है । इस सीट पर पांचवे चरण में 20 मई को मतदान होना है और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अभी तक उम्मीदवार के नाम को लेकर माथापच्ची में फंसी है। इस सीट पर 1952 से लेकर 1980 तक कांग्रेस की मजबूत पकड़ रही। वर्ष 1952 में रघुनाथ विनायक धुलेकर व वर्ष 1957, 1962 व 1967 में तीन बार डॉ. सुशीला नैय्यर इंडियन नेशनल कांग्रेस से सांसद रही हैं । वर्ष 1971 में गोविन्ददास रिछारिया इंडियन नेशनल कांग्रेस से सांसद रहे व इसके उपरान्त आपातकालीन व्यवस्था लागू हो जाने पर वर्ष 1977 में चुनाव हुए।
वर्ष 1980 में विश्वनाथ शर्मा सांसद चुने गये व जनता पार्टी की सरकार गिर जाने से वर्ष 1984 व वर्ष 1999 में सुजान ंिसह बुन्देला इंडियन नेशनल कांग्रेस से दो बार सांसद रहे हैं । वर्ष 2009 में प्रदीप जैन आदित्य इंडियन नेशनल कांग्रेस से सांसद रहे हैं। इसी प्रकार वर्ष 1977 में सुशीला नैय्यर जनता पार्टी से सांसद रही हैं व इसके उपरान्त वर्ष 1989, 1991, 1996 व 1998 में चार बार भाजपा से राजेन्द्र अग्निहोत्री सांसद रहे हैं । वर्ष 2004 में चन्द्रपाल ंिसह यादव समाजवादी पार्टी से सांसद रहे हैं व वर्ष 2014 में उमा भारती व 2019 में अनुराग शर्मा भारतीय जनता पार्टी से सांसद रहे हैं।
इस बार के चुनाव में एक ओर अनुराग शर्मा अपने प्रचार में क्षेत्र में मोदी सरकार के कारण हुए विकास और रोजगार की समस्या के स्थायी समाधान के लिए शुरू किये गये प्रोजेक्टों तथा अन्य योजनाओं को आगे रखकर जनता का भरोसा पाने की कोशिशों में जुटे हैं तो दूसरी ओर गठबंधन उम्मीदवार सत्ता पक्ष की खामियां और चुनावी वादों को खोखला बताते हुए सत्ता में आने पर जनता के हित में किये जाने वाले कार्यों की सूची दिखाकर लोगों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता वर्तमान सांसद की खामियों को दरकिनार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए शुरू किये गये कार्यों और वादों पर फिर भरोसा जताती है या सत्तारूढ़ पार्टी के वादों को खोखला मानते हुए कांग्रेस उम्मीदवार का दामन थामती है।