प्रयागराज | समाजवादी पार्टी के दिगगज नेता रेवती रमण सिंह के बेटे पूर्व विधायक उज्जवल रमण सिंह कांग्रेस के ंिसबल पर इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लडेंगे।
सिंह ने शनिवार को बताया कि चुनाव के दौरान नेताओं के पास बहुत विकल्प होते है और तमाम पार्टियां उन्हें अपने साथ शामिल करना चाहती हैं। नेता को अपने दल से टिकट नहीं मिलने पर दूसरे दल से टिकट लेकर चुनाव लड़ते हैं लेकिन यह बात बहुत स्पष्ट है कि वह चुनाव भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया) से कांग्रेस के ंिसबल पर और समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव की सहमति से लडेंगे।
कांग्रेस में शामिल होने को लेकर पूछने पर मुस्कराते हुए कहा कि परिणाम जल्द ही सबके सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि राजनीति में किसी भी नेता को बोलने से पहले उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह जनता का प्रतिनिधि है और उसके शब्द लोगों के बीच सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम से भरे होते हैं।
गौरतलब है कि पिछले दिनों लखनऊ में रेवती रमण ंिसह पीजीआई में उपचार कराने गए थे। वहां उनसे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पाडेय और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मुलाकात की थी। दोनों कांग्रेसी नेताओं की मुलाकात को लेकर सियासी गलियारे में श्री रेवती रमण और उज्जवल रमण ंिसह के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा जोरों पर है। श्री रेवती रमण ंिसह के पीजीआई से उपचार कराकर प्रयागराज स्थित आवास पर आने के बाद कांग्रेस के पूर्व विधायक अनुग्रह नरायण ंिसह के भी उनसे शिष्टाचार मुलाकात के बाद उनके कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की बात को बल मिल रहा है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन में फूलपुर लोकसभा की सीट सपा के पाले में गयी है जबकि कांग्रेस के पास प्रयागराज की सीट है। 1984 के बाद जीत के लिए तरस रही कांग्रेस फूलपुर और प्रयागराज सीट पर किसी ऐसे जिताऊ प्रत्याशी को मैदान में उतारना चाहती है जिसकी तुलना में विपक्षियों के तरकश में उसका काट नहीं हो।
पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लहर के बावजूद अभी तक फूलपुर और प्रयागराज लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने किसी प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है। वही स्थिति अन्य पाटियां कांग्रेस, सपा (गठबंधन) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अभी तक अपने प्रत्याशी के नाम का खुलासा नहीं किया है। भाजपा फूलपुर और प्रयागराज दोनो सीटों पर पिछले दोनो लोकसभा चुनावों में जीत हासिल कर 2024 के लोकसभा में हैट्रिक लगाने के प्रयास में मजबूत दावेदार पेश करना चाहती है तो फूलपुर से पांच बार की विजेता सपा अपना खोया हुआ वजूद वापस पाने की भरसक प्रयास में है। लंबे समय से जीत के लिए तरस रही कांग्रेस किसी प्रकार से मौका नहीं गंवाना चाहती। वह भी और एक बार जीत का स्वाद चखना चाहती है। एक बार की विजेता बसपा भी अपने को किसी से पीछे आंकने को तैयार नहीं है। वह भी अन्य पार्टियों के दावेदारों की मजबूती को देखकर उनका तोड़ रखना चाहती है।