ईटानगर | अरुणाचल प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में विधायकों को राज्य विधानसभा में निर्विरोध चुने जाने की प्रथा वर्ष 1999 में तब शुरू हुई, जब इसके चार नेता निर्विरोध चुनाव जीते।
अरुणाचल प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में विधायकों को राज्य विधानसभा में निर्विरोध चुने जाने की प्रथा 1999 में तब शुरू हुई, जब इसके चार नेता निर्विरोध चुनाव जीते। वर्ष 2019 के चुनावों में, तीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक निर्विरोध चुने गए जबकि 2014 के चुनावों में, वर्तमान मुख्यमंत्री पेमा खांडू सहित 11 कांग्रेस उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। हालांकि, अधिकांश विधायक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा की सरकार बन गई।
एक बुद्धिजीवी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लोकतंत्र के लिए 'स्वस्थ' विपक्ष महत्वपूर्ण है। उन्होंने विधायकों के निर्विरोध चुने जाने की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इसलिये निर्विरोध चुने जाना ठीक नहीं है।'' उनÞ्होंने सुझाव दिया कि अगर चुनावों में पैसे की संस्कृति पर अंकुश लगा दिया जाये तो एक समाधान चुनावों का राज्य वित्त पोषण हो सकता है और गरीब, आम नागरिक भी चुनाव लड़ने की इच्छा रख सकते हैं।
अनुसंधान विभाग के सेवानिवृत्त सहायक निदेशक एवं उत्साही समाजशास्त्री आरएन कोले ने कहा, यदि ऐसा है, तो वयस्क मताधिकार की भावना की घोर अनदेखी की जाएगी। भारतीय मतदाता राजनीतिक रूप से काफी परिपक्व हैं। वे हर पांच साल में किसी और को वोट देने या न डालने (नोटा) देने के अवसर के हकदार हैं।
निर्विरोध चुनाव की प्रथा को "लोकतंत्र का मजाक" बताते हुए श्री कोले ने सुझाव दिया कि चुनाव निकाय ऐसे उम्मीदवारों के चुनाव को रद्द कर सकता है और इसके बजाय उसे फिर से अधिसूचित कर सकता है। उन्होंने लोकतंत्र के उपहास को रोकने के लिए सरकार को भविष्य में मजबूत कानून बनाने की भी सिफारिश की।
उम्मीदवारों के निर्विरोध चुनाव के गुण और दोष दोनों को इंगित करते हुए, सूचना और जनसंपर्क विभाग के सेवानिवृत्त उप निदेशक डेन्हांग बोसाई ने कहा कि निर्विरोध चुनाव के मामले में, इससे दोनों उम्मीदवारों और सरकार की ओर से करोड़ों संसाधनों की बर्बादी को रोकने में मदद मिलेगी, जिसे चुनाव के बाद जनकल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किया जा सकता है।
इसके अलावा, दूरदराज के कुरुंग कुमे जिले जैसे स्थानों में चुनाव संबंधी ंिहसा और अन्य कानून-व्यवस्था के मुद्दों की घटना की संभावना कम होगी, जहां हर चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था की समस्याएं देखी जाती थीं वरिष्ठ भाजपा नेता एवं उप मुख्यमंत्री चाउना मीन ने कहा, ‘‘यह (निर्विरोध चुनाव) नेतृत्व में विश्वास और खांडू सरकार द्वारा की गई परिवर्तनकारी पहलों को दर्शाता है, जो अरुणाचल प्रदेश के लोगों के लिए उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।’