लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ फिल्म 'द केरल स्टोरी' देखी।
लोकभवन ऑडिटोरियम में फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग की गई थी। फिल्म के दौरान मुख्यमंत्री पूरे समय मौजूद रहे। यहां मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में भाजपा के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों से जुड़ी महिलाओं, स्कूली छात्र-छात्राओं और मीडिया के प्रतिनिधि की उपस्थिति रहे।
बाद में श्री योगी ने ट्वीट कर फिल्म से जुड़े सभी लोगों का अभिनंदन करते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
धर्मांतरण पर आधारित फिल्म को लेकर प्रदेश सरकार ने खास दिलचस्पी जाहिर की है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में लव जेहाद व धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के लिए 27 नवंबर 2020 को विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020 लागू किया गया था। इसके तहत यूपी में धर्मांतरण कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को अपराध की गंभीरता के आधार पर 10 साल तक की जेल हो सकती है। कानून में जुर्माने की राशि 15 हजार से 50 हजार तक है। अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों को शादी करने से दो महीने पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होता है। जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर न्यूनतम 15 हजार रुपये के जुर्माने के साथ एक से पांच साल की कैद का प्रावधान है। एससी/एसटी समुदाय के नाबालिगों और महिलाओं के धर्मांतरण पर तीन से 10 साल की सजा का प्रावधान है। जबरन सामूहिक धर्मांतरण के लिए तीन से 10 साल जेल और 50 हजार रुपये जुर्माना लगेगा। कानून के मुताबिक अगर विवाह का एकमात्र उद्देश्य महिला का धर्म परिवर्तन कराना था, तो ऐसी शादियों को अवैध करार दिया जाएगा।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यूपी में 27 नवंबर 20 से 30 अप्रैल 2023 तक धर्मांतरण से जुड़े 433 मामले दर्ज किए गए। इसमें अब तक 855 से ज्यादा गिरफ्तारी भी हो चुकी है। 184 मामलों में पीड़तिाओं ने न्यायालय के समक्ष जबर्दस्ती धर्म बदलवाने की बात भी कबूल की है। वहीं नाबालिगों के धर्मांतरण के अब तक 66 मामले दर्ज किए गए हैं।
गौरतलब है कि केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने नौ दिसंबर 2009 को दिए फैसले में जबरन मतांतरण को लेकर सख्त टिप्पणी भी की थी। उन्होंने कहा था प्यार के नाम पर यहां जबरन मतांतरण कराया जा रहा है। सरकार को इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए।
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