आरआर मुख्यालय के सामने और स्मृति वाटिका के पास सैकड़ो मीटर जलकुंभी और कूड़े से ढकी है गोमती ।
लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नगर निगम के अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प और यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ के आदेशों को ताक पर रख रहे हैं । प्रधानमंत्री मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अधिकारियों को नदियों को स्वच्छ रखने के लिए निर्देशित करने के साथ-साथ कई बार फटकार भी लगा चुके हैं लेकिन अधिकारियों पर इस फटकार और डांट का कोई खासा असर होता नहीं दिख रहा है । प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बहने वाली गोमती नदी का बीच शहर के हाई सिक्योरिटी जोन में इतना बुरा हाल है जिसको देखने से यह साफ पता चलता है कि मुख्यमंत्री की आंखों में लखनऊ नगर निगम के अधिकारी धूल झोंकने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं । शहर के वीआईपी जोन समतामूलक चौक , स्मृति वाटिका के पास , रिवर फ्रंट की समाप्ति पर जलकुंभी और कूड़े से सैकड़ों मीटर नदी इस कदर पटी पड़ी है कि सड़क से देखने पर आपको नदी का पानी नहीं दिखाई पड़ेगा सिर्फ हरी जलकुंभी और कूड़े के दर्शन होंगे । गोमती मैया कराह रही है लेकिन अधिकारी है कि सुनने को तैयार नहीं है।
करोड़ों में है गोमती साफ करने का बजट ।
शहर में बहने वाली गोमती नदी को साफ करने की जिम्मेदारी लखनऊ नगर निगम पर है और इसके लिए नगर निगम में बकायदा करोड़ों का बजट भी है । एक प्राइवेट कंपनी को इसके ठेका दिया गया है जिसने अपने ड्राइवर और मशीनरी लगा रखी है और उन ड्राइवर और मशीनों का भुगतान लाखो रुपए महीना है साथ ही साथ गोमती नदी की सफाई में लगी हर मशीन को जिसमे जेसीबी इत्यादि मशीनें है उनको लाखों रुपए का डीजल भी हर महीने उपलब्ध कराया जाता है । इतना भारी भरकम बजट खर्च होने के बाद भी राजधानी की मुख्य नदी जो शहर के वीआईपी इलाकों से होकर गुजरती है नही साफ हो पा रही है । गोमती का पानी काला हो चुका है जलकुंभी और कूड़ा सैकड़ों मीटर तक नदी को ढके हुए हैं लेकिन नगर निगम की फाइलों में गोमती निरंतर साफ की जा रही है और उसका पानी भी निर्मल है ।
आरआर मुख्यालय के सामने ही लगा है जलकुंभी और कूड़े का ढेर ।
लखनऊ निगम के आरआर विभाग के सामने बैराज के पास जलकुंभी और कूड़े का ढेर लगा हुआ है लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को ये ढेर नजर नहीं आता है ।बता दे कि रोजाना गोमती की सफाई में लगी हुई गाड़ियों को डीजल का भी भुगतान होता है ड्राइवर की तनख्वाह भी हर महीने जाती है लेकिन गोमती मैया को कूड़े और जलकुंभी का भार ढोना पड़ता है । नगर निगम के आरआर विभाग के पास ही कुकरैल नाला भी आकर गोमती नदी से मिलता है और निरंतर उस नाले से कचरा गोमती नदी में जा रहा है । कुकरैल नाले की भी स्थिति भयावह है कचरे से पटा पड़ा है लेकिन नगर निगम के एक जिम्मेदार कर्मचारी का कहना है कि नाले की सफाई नगर निगम के सीमा में नहीं आती है । बात अगर ऐसी है तो सवाल यह उठता है कि नाले से आने वाले कूड़े और नाले की सफाई नहीं की जाएगी तो गोमती में बहने वाले कचरे से छुटकारा कैसे पाया जाएगा ?
