लखनऊ | उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान में आवासीय सरल संस्कृत भाषा शिक्षक प्रशिक्षण वर्ग का समापन समारोह हुआ ।
कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। वहाँ आकाश, आदित्य और करुणेश के द्वारा मन्त्रों को उच्चारित किया गया ।
तपोभूमि गुरुकुल के वटुकों ने वैदिक मंगलाचरण किया । श्रेया एवं सीमा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद श्रेया, सीमा और शीला ने संस्थान गीतिका को गाया। योजना समन्वयक सुश्री राधा शर्मा ने सभी अतिथियों का परिचय कराया।
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक श्री विनय श्रीवास्तव,ओमप्रकाश पांडे , प्रो. उमारानी, डॉ. रेखा शुक्ला, प्रो. अभिमन्यु, डॉ. गौरव व अन्य मौजूद रहे।
संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी जगदानंद झा ने उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान का परिचय दिया।
सुश्री गीता वशिष्ठ ने कक्षा में प्राप्त हुआ अपना अनुभव साझा किया। श्री पुनीत ने संस्कृत में एक प्रेरणादायक कथा सुनाई जिसका शीर्षक था "आत्मा को सजाना है, शरीर को नहीं।"
प्रो.ओमप्रकाश पांडे ने कहा कि संस्कृत समाज की भाषा है। यह संस्थान संस्कृत को सर्वत्र फैलाता है।
प्रो अभिमन्यु ने बताया कि संस्कृत में सब कुछ निहित है। देश व समाज का विकास तभी हो सकता है जब हम संस्कृत का आचरण करेंगे।
प्रो उमारानी त्रिपाठी ने कहा कि यह "गृहे गृहे संस्कृत" योजना सभी को संस्कृत में बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
डॉ. गौरव सिंह ने संस्कृत एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की योजना की सराहना की और कहा कि यह योजना जारी रहनी चाहिए। सुश्री रेखा शुक्ला ने भी संस्कृत की विशेषताओं के बारे में बताया।
कार्यक्रम के दौरान कुछ लड़कियों ने संस्कृत में एक नाटक भी प्रस्तुत किया।
प्रशिक्षण का नेतृत्व श्री सुधिष्ठ मिश्र ने किया, योजना सर्वेक्षक भगवान सिंह चौहान व चन्द्रकला शाक्या जी हैं । योजना समन्वयक धीरज मैठाणी, दिव्य रंजन, राधा शर्मा और अनिल गौतम थे। प्रशिक्षक सचिन शर्मा , श्वेताबरनवाल, स्तुति गोस्वामी , धनंजय व विमलेश ने वर्ग में प्रशिक्षण दिया।
संपूर्ण वर्ग में जिन लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे कुल मिलाकर 52 लोग हैं। 27 पुरुष और 25 महिलाएं सभी ने यहां प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब अन्य छात्रों को पढ़ाएंगे।