सचिन शर्मा , मोदीनगर , गाजियाबाद उ.प्र. । भाषा विभाग के अधीन उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा संचालित ऑनलाइन संस्कृत शिक्षण कक्षाओं के अंतर्गत बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया । इसमें मुख्य वक्ता के रूप में गुरुकुल महाविद्यालय ततारपुर हापुड़ के प्रवक्ता व पाठ्यचर्या समिति सदस्य , उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद लखनऊ के आचार्य कुशल देव ने कहा कि आज संस्कृत मानव जीवन में कंप्यूटर या संगणक की तरह उपयोगी है। जैसे कंप्यूटर में सीपीयू प्रधान संसाधन विभाग होता है, उसमें सारी स्मृतियां संगृहीत होती हैं वैसे ही संस्कृत के श्रद्धावान् अध्येता संगणक की भांति अपार स्मरण शक्ति धारण करते हैं । कंप्यूटर में कीबोर्ड के बिना कोई कार्य संभव नहीं होता वैसे ही संस्कृत ग्रंथों व शास्त्रों के बिना मानव का कोई विकास नहीं होता । माउस को जैसे स्नेह पूर्वक संचालित करते हैं वैसे ही गुरु का हाथ जब शिष्य के मस्तक पर रहता है तो उसे संस्कृत में उपलब्ध सारी विद्याएं सहज ही प्राप्त हो जाती हैं। यू.पी.एस.अर्थात् अनवरत विद्युत आपूर्ति की तरह संस्कृत में ईश्वरीय और आध्यात्मिकता के तत्व हमें निरंतर सूर्य की तरह ऊर्जा प्रदान करते रहते हैं। हमारे जीवन में संस्कृत के विकास का बड़ा ही महत्व है । जैसे फोल्डर में अथवा संचिका में संग्रहण का काम होता है, वैसे ही हमारे जीवन - संचिका में संस्कृत के ज्ञान व सभी शास्त्रों का संचयन आवश्यक है । संस्कृत छात्रों के रोजगार के लिए शिक्षण क्षेत्र, प्रशासनिक सेवाएं ,सेना व कर्मकांड, ,सरकारी संग्रहालयों में संस्कृत पाण्डुलिपियोंं के संंरक्षण व प्रकाशन आदि कार्यों में रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष वाल्मीकि जयंती के अवसर पर संस्कृत-गीत-नाटक आदि प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं ।और पुरस्कार वितरण-समारोह होता है। संस्कृत के विद्वानों के संवर्धन व संस्कृत के सम्यक् प्रचार- प्रसार हेतु संस्कृत साहित्य-काव्य और विविध शास्त्र-लेखन आदि के लिए बहुविधि पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। मातृवत श्रद्धा के साथ हमें संस्कृत भाषा का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। हमें पाश्चात्य संस्कृति के पीछे नहीं भागना चाहिए , बल्कि संस्कत के विकास द्वारा अपनी भारतीय विरासत की सुरक्षा जरूर करनी चाहिए।
कार्यक्रम का आरम्भ निखिल शर्मा के मंगलाचरण व कविता अग्रवाल के सरस्वती वंदना से की गई। विदुषी अग्रवाल ने संस्थान गीतिका प्रस्तुत की । अतिथियों का परिचय और स्वागत आराधना रावत ने किया। कक्षाओं के अनुभव कथन स्मृति गुप्ता ,आदित्य रावत, डॉ० राघवेंद्र मिश्र, मुकेश लोधी , निशा पाण्डेय और डॉ० भागीरथी मिश्र ने किया। निशा ने मधुर संस्कृत गीत प्रस्तुत किया। मंच संचालन संस्थान प्रशिक्षक सचिन शर्मा ने किया व तकनीकी सहयोग ओमदत्त द्विवेदी ने किया। संस्थान के प्रशिक्षक डॉ० सत्यप्रकाशमिश्र ने समागतों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया । अन्त में प्रदीप तिवारी ने शान्ति मन्त्र का पाठ किया।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक श्री विनय श्रीवास्तव प्रशासनिक अधिकारी श्री दिनेश मिश्र, जगदानंद झा, योजना सर्वेक्षिका डॉ०चंद्रकला शाक्या प्रशिक्षण प्रमुख श्रीसुधिष्ठ मिश्र प्रशिक्षण समन्वयक श्री धीरज मैठाणी , श्री दिव्यरंजन , सुश्री राधाशर्मा सभी प्रशिक्षुगण, प्रशिक्षक और अन्य सामाजिक संस्कृतानुरागी जन ऑनलाइन उपस्थित रहें ।