इटावा | वन विभाग की व्यापक सक्रियता के बावजूद भी उत्तर प्रदेश के इटावा स्थित चंबल इलाके से दुर्लभ प्रजाति के हजारों कछुओ को मार कर उनकी कैलोपी की तस्करी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
अब से काफी पहले ंिजदा कछुओं की तस्करी चंबल इलाके से पश्चिम बंगाल के लिए की जाती थी लेकिन कछुओ की तस्करी में जोखिम होने के कारण कछुआ की कैलोपी आसान हो गई है। कैलोपी की तस्करी में जोखिम कम है और फायदा ज्यादा है और इसी कारण तस्कर लगातार कछुआ का शिकार करने में जुटे हुए हैं।
वन विभाग और यूपी एसटीएफ ने संयुक्त रूप से दिल्ली हावड़ा रेलमार्ग के अति महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन इटावा से एक महिला समेत दो तस्करों को बुधवार को गिरफ्तार किया है, जिनके कब्जे से तीन बैगों में भारी करीब 36 किलो कैलोपी बरामद की गई है। यह कैलोपी सेक्सुअल पावर बढ़ाने के लिए सूप बनाकर पीने के प्रयोग में ली जाती है।अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस कैलोपी की कीमत लगभग कई करोड़ रुपये आंकी जा रही है। बरामद कैलोपी निलसोनिया, गैंगटिकस, निलसोनिया हिरउम, चित्रा इंडिका प्रजाति के कछुओं की है।
सूत्रों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में दो लाख रुपए प्रति किलोग्राम कीमत से कैलोपी की बिक्री होती है जबकि कोलकाता में इसको मात्र 4000 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदा जाता है। एशियाई देशों में थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया सहित कई देशों में कछुओं की केलोपी की विशेष मांग के चलते तस्करी आम बात हो गई है।
इटावा से कछुआ कैलोपी तस्करी होने की सूचना पर प्रभागीय वानिकी निदेशक अतुल कांत शुक्ला के नेतृत्व में वन विभाग एवं कानपुर एसटीएफ ने इटावा जंक्शन पर छापामारी की। प्लेटफार्म नंबर तीन पर जोधपुर हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन के इंतजार में बैठी राजेन्द्री देवी एवं उसके देवर जगदीश निवासी कोकपुरा थाना फ्रेंड्स कालोनी को टीम ने घेराबंदी कर पकड़ लिया। वह कोलकाता इसे बेचने के लिए जा रहे थे। जिसे वह चार हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं। इससे पहले दो बार वह लोग तस्करी कर चुके हैं।
कछुओं की कैलोपी को वह मध्य प्रदेश, इटावा, फिरोजाबाद, आगरा एवं मैनपुरी जिलों के शिकारियों से खरीदते थे।
डीएफओ अतुल कांत शुक्ला ने बताया कि आम धारणा ऐसी मानी जाती है कि कैलोपी का शक्तिवर्धक दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है। तस्कर कछुआ को मारने के बाद उसका कवच उतारते हैं। उसकी खाल नहीं होती है। जिसके बाद मांस को उबाल कर चिप्स की तरह तैयार करते हैं, जिन्हें बंगाल और कोलकाता में दवा बनाने वालों को यह लोग बेचते हैं। इन दोनों पर विभागीय कार्रवाई के साथ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई भी कराई जाएगी।