नैनीताल | उत्तराखंड उच्च न्यायालय गुरूवार को सहायक अध्यापक विशेष शिक्षा के 380 पदों के लिये होने वाली भर्ती पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है और राज्य सरकार तथा राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाये गये बिन्दुओं का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए है।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की युगलपीठ ने गोपाल ंिसह गोनिया और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई के बाद यह आदेश दिया हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से राज्य सरकार के 25 मार्च, 2023 के उस आदेश को चुनौती दी गयी है जिसमें सरकार की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सहायक अध्यापक विशेष शिक्षा के पदों को भरने के निर्देश दिये गये थे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सरकार ने इस वर्ष 23 मार्च को एक आदेश जारी कर सहायक अध्यापक विशेष शिक्षा के 380 पदों को भरने के लिये आदेश जारी किये हैं और इसके लिये स्रातक एवं शिक्षक पात्रता परीक्षा-1 (टीईटी-1) के साथ ही डीएलएड या बीएड स्पेशल एजुकेशन निर्धारित की योग्यता निर्धारित की गयी है। उन्होंने कहा कि यह आदेश एनसीटीई की गाइड लाइन के खिलाफ है। एनसीटीई की ओर से कक्षा एक से पांच तक के लिये 11 फरवरी, 2011 को जो योग्यता निर्धारित की गयी है उसमें स्रातक के साथ बीएड स्पेशल एजुकेशन निर्धारित नहीं है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से समय समय पर केन्द्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) और उत्तराखंड अध्यापक पात्रता परीक्षा (यूटीईटी) की परीक्षा आयोजित की जाती है उसके लिये भी स्रातक के साथ बीएड स्पेशल एजुकेशन की योग्यता निर्धारित नहीं की गयी है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वर्ष 2017 में जब कुछ उम्मीदवारों ने बीएड स्पेशल एजुकेशन के आधार पर टीईटी-1 के लिये आवेदन किया गया तो उत्तराखंड एजूकेशन बोर्ड की ओर से कहा गया कि वे बीएड स्पेशल एजुकेशन के आधार पर पास नहीं हैं।
सरकार की ओर से भी दिये गये शपथपत्र में कहा गया कि वर्ष 2016 तक बीएड स्पेशल एजुकेशन की डिग्री मान्य थी लेकिन उसके बाद नहीं। अदालत एनसीटीई के जवाब से भी संतुष्ट नजर नहीं आयी। अदालत ने माना कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद एनसीटीई की ओर से 11 फरवरी, 2011 की गाइड लाइन में आज तक संशोधन नहीं किया गया है। जिसमें टीईटी-1 के लिये स्रातक के साथ बीएड स्पेशल एजुकेशन की योग्यता मान्य हो।
न्यायालय ने पूरी भर्ती पर अगली सुनवाई तक रोक जारी करते हुए राज्य सरकार और एनसीटीई को निर्देश दिये कि याचिका में उठाये गये बिन्दुओं का जल्द समाधान करे। इस मामले में तीन सप्ताह बाद सुनवाई होगी।