बालन अलास्कन नाइट्स फ्रेंचाइजी से जुड़ चुके साधवानी ने बुधवार को कहा, ‘‘सच कहूं तो जब मुझे इस लीग के बारे में पता चला तो मैं बहुत उत्साहित था और इसका बेसब्री से इंतजार कर रहा था। इसके प्रारूप ने मुझे आकर्षित किया क्योंकि यह ऐसी लीग है, जिसमें 36 बहुत मजबूत खिलाड़यिों को एक साथ लाने का एक अनूठा विचार है। मैंने इस प्रतिष्ठित इवेंट का हिस्सा बनने का फैसला किया क्योंकि यह मुझे मजबूत विरोधियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने, अनुभव हासिल करने और साथ ही खेल का लुत्फ उठाने का अवसर देता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जीसीएल पहला ऐसा आयोजन है जो इस खेल को वैश्विक स्तर पर और अधिक लोकप्रिय बना देगा। मुझे लगता है कि इसके बाद युवा खिलाड़यिों की खेल में दिलचस्पी बढ़ेगी। क्रिकेट में हमारे पास आईपीएल है और 2008 में इसकी शुरुआत के बाद, हमने कई युवाओं को क्रिकेट को अपनाते हुए देखा। उम्मीद है कि यह लीग भी शतरंज पर वैसा ही प्रभाव डालेगी।’’ ग्लोबल चेस लीग का आयोजन 21 जून से दो जुलाई के बीच दुबई के चेस एंड कल्चरल सेंटर में होना है। इस आयोजन में पुरुष एवं महिला खिलाड़यिों से सजी छह फ्रेंचाइजी हिस्सा ले रही हैं। मात्र 13 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बनने वाले साधवानी मिश्रित टीम प्रारूप से बेहद प्रभावित हैं।
साधवानी ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह एक अद्भुत पहल है जो खिलाड़यिों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का अवसर देती है। मैं व्यक्तिगत रूप से टीम स्पर्धाओं में खेलने का अधिक आनंद लेता हूं। सबसे पहले, पूरी लीग के दौरान टीम के साथ बने रहना मजेदार है। टीम स्पर्धाओं में प्रत्येक व्यक्ति टीम की सफलता में अपनी भूमिका निभाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम नये दोस्त बनाते हैं और उनके बारे में कई दिलचस्प बातें पता चलती हैं। मुझे लगता है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों का एक ही टीम में होना दिलचस्प होगा। यह टीम में अलग गतिशीलता भी जोड़ेंगे।’’ साधवानी ग्रैंडमास्टर बनने वाले शतरंज इतिहास के 10वें सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं और चौथे सबसे कम उम्र के भारतीय हैं। महाराष्ट्र के नागपुर से ताल्लुक रखने वाला यह युवा ग्रैंडमास्टर 2015 में अंडर-10 राष्ट्रमंडल चैंपियन था।
सात साल की उम्र में अपनी शतरंज की यात्रा शुरू करने वाले साधवानी खिलाड़यिों की उस प्रतिभा से काफी प्रभावित हैं जो भारत को आगे ले जा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘कई युवा भारतीय प्रतिभाएं हैं जो अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। जीसीएल एक बेहतरीन शुरुआत है और मुझे उम्मीद है कि कई अन्य यूरोपीय देशों की तर्ज पर भारत के पास भी आने वाले वर्षों में अपनी शतरंज लीग होगी।