बांग्लादेश के निवासियों ने अपनी उक्त प्रकार की अभिव्यक्ति कभी शंकराचार्य का अभूतपूर्व स्वागत करके तो कभी वाणी से व्यक्त की। उनका स्वागत न केवल सभी धर्म के लोगों ने किया बल्कि बांग्लादेश की सरकार ने उनकी पूरी यात्रा के दौरान उच्च स्तरीय प्रोटोकॉल एवं सुरक्षा की व्यवस्था की।
द्वादस ज्योतिर्लिंग और 52 शक्तिपीठों का पूजन करने के साथ साथ जगदगुरू एक बार पुन: उस महाअभियान को सफल करने को अग्रसर हैं जिसके अन्तर्गत आदि शंकराचार्य ने सैकड़ों वर्ष पूर्व अखण्ड भारत की यात्रा उत्तर भारत के निवासियों को दक्षिण और पूर्व के निवासियों को पश्चिम से जोड़ने के लिए की थी। वे द्वादस ज्योतिर्लिग एवं तीन दर्जन से अधिक शक्तिपीठों का अब तक पूजन कर देश को सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक एकता के धागे में पिरोने का कार्य कर रहे हैं। वे भारत के बाहर श्रीलंका, नेपाल और अब बांग्ला देश की शक्तिपीठों का पूजन कर चुके हैं।
उनकी आठ दिन की बांग्लादेश यात्रा में 9 लोगों का प्रतिनिधि मण्डल था जिसमें त्रिपुरा सरकार की विधानसभा के उपाध्यक्ष राम प्रसाद पॉल, कई संत, विद्वान शामिल थे।
अपनी यात्रा के अनुभवों को पत्रकारों के समक्ष रखते हुए उन्होंने बताया कि बांग्लादेश के निवासी इसलिए बहुत अधिक उत्साहित थे कि सैकड़ों वर्ष बाद कोई धर्माचार्य उनके कल्याण के लिए वहां पर आया था। उन्होंने यह भी बताया कि बांग्लादेश के निवासी जाति पांति के बंधनों को तोड़कर समय समय पर न केवल उनके शक्तिपीठो के पूजन के दौरान शामिल हुए बल्कि वे हवन तक में शामिल हुए।
गोवर्धन पीठाधीश्वर ने बताया कि बांग्लादेश पहुंचने पर ढाका एयरपोर्ट पर जहां उनका स्वागत करने के लिए वहां की सत्ताधारी पार्टी के सांसद पंकजनाथ एवं सांसद अर्चना गोरो समेत जनप्रतिनिधि मौजूद थे वहीं विभिन्न शक्तिपीठों पर सांसद पंकजनाथ, सांसद एसएम जगतुल हैदर, न्यायाधीश अरूणाभ चक्रवर्ती, तथा वहां के अधिकारी मौजूद थे।
शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने राजनैतिक नेताओ, समाज के संभ्रान्त लोगों एवं अधिकारियों से धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा भी की।उन्होंने बताया कि सांसदों जगतुल हैदर, गुलाम मोहम्मद कादिर, सैयद आबू हुसेन का कहना था कि जगदगुरू की इस यात्रा से दोनो देशों के संबंध और प्रगाढ़ होंगे।
बांग्लादेश की यात्रा के दौरान शंकराचार्य ने खुलना में यशोरेश्वरी शक्तिपीठ, चिटगॉंग जिले में तत्तल भवानी शक्ति पीठ, बागूरा जिले में अपर्णा शक्तिपीठ, शिकरपुर नगरपालिका क्षेत्र में सुगन्धा शक्तिपीठ के साथ साथ वहां के प्रमुख मन्दिरों में भी पूजन अर्चन किया। प्रतिनिधि मंडल के एक सदस्य ने बताया कि जगदगुरू ने ढाका में ढाकेश्वरी सिद्धपीठ में भी देवी माता के दर्शन और पूजन किया।
प्रतिनिधि मंण्डल के एक अन्य सदस्य ने बताया कि जगदगुरू ने नवम्बर 2021 से 12 ज्योतिर्लिंगों एवं 52 शक्तिपीठों में पूजन अर्चन करने की शुरूवात की थी। इस दौरान उन्होनें देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का प्रयास किया। चातुर्मास के बाद शंकराचार्य शेष बची शक्तिपीठों में पूजन अर्चन करेंगे।
शंकराचार्य का कहना था कि उनकी बांग्लादेश की धार्मिक यात्रा सफल न होती यदि इसमें भारत और बांग्लादेश की सरकारों ने सहयोग न किया होता। उनका प्रयास है कि अपनी यात्रा के माध्यम से समाज को ’’सर्वे भवन्तु सुखिन:’’ का ऐसा संदेश दें जिससे भारत एक बार पुन विश्व गुरू बने जिसके लिए प्रधानमंत्री सतत प्रयास कर रहे हैं।